भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान क्षेत्रीय केंद्र शिमला के वैज्ञानिकों ने “उर्वरकों का संतुलित उपयोग” विषय पर “मेरा गाँव मेरा गौरव” कार्यक्रम के अंतर्गत चायली गाँव का भ्रमण कर जानकारी प्रेषित की….

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शिमला: पहाड़ी खेती, समाचार; भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर)क्षेत्रीय केंद्र शिमला के वैज्ञानिकों ने डॉ. जितेन्द्र कुमार (कार्यक्रम समन्वयक) के साथ गत दिनों “मेरा गाँव मेरा गौरव” कार्यक्रम के अंतर्गत चायली गाँव का भ्रमण किया। कार्यक्रम का मुख्य विषय भारत सरकार एवं आईसीएआर द्वारा प्रोत्साहित “उर्वरकों का संतुलित उपयोग” रहा।

कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ संवाद स्थापित कर बागवानी एवं सतत कृषि से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी साझा की। डॉ. कल्लोल कुमार प्रमाणिक ने किसानों को कीवी ट्रेलिस प्रणाली के वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में जानकारी दी तथा बेहतर उत्पादन हेतु उचित संरचना एवं कैनोपी प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला।

वहीं डॉ. संतोष वाटपाडे ने समशीतोष्ण फल फसलों में रोग प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की तथा किसानों को समेकित रोग प्रबंधन उपाय अपनाने की सलाह दी।

डॉ. पूजा देवी ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान किसानों को मृदा नमूना संग्रहण की वैज्ञानिक विधियों का प्रदर्शन किया तथा संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने हेतु मृदा परीक्षण के महत्व को समझाया।

कार्यक्रम में स्थानीय किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा वैज्ञानिकों द्वारा प्रदान की गई व्यावहारिक जानकारी की सराहना की। यह पहल किसान एवं वैज्ञानिकों के बीच संवाद को मजबूत करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सतत कृषि विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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